कुछ अक्षर तेरे नाम के ,
और उनसे जुडे दिल के पैगाम,
सब मैं बहा आई थी दरिया में,
साथ मेरे आया तेरा अधूरा नाम,
और वो अक्षर ..........
लहरों ने किनारे की रेत से मिला दिए,
वो गीली रेत अब भी चिपकी है मेरे पैरों पे,
बेडी से वो अक्षर मुझे फिर बांधे खड़े हैं1